JSGIF संस्थापक
वे चार दूरदर्शी, जिन्होंने जैन सोशल ग्रुप उपक्रम की नींव रखी

JSGian Kantilal L. Vora
जैन सोशल ग्रुप उपक्रम के चार संस्थापक स्तंभों में से एक, श्री कांतिलालभाई वोरा, 1954 से 1964 तक मुंबई के स्थानकवासी जैन युवक मंडल से जुड़े रहे और सबसे पहले जैन सोशल ग्रुप - द जैन सोशल ग्रुप मुंबई मेन - के संस्थापक अध्यक्ष बने। महान महत्वाकांक्षा और अथक प्रयासों से प्रेरित होकर वे 10 वर्षों तक अध्यक्ष रहे और उन्होंने जैन सोशल ग्रुप उपक्रम को एक फलदायी वृक्ष के रूप में खिलते देखा।

JSGian Chimanlal J. Shah
आदरणीय श्री सी.जे. शाह JSG उपक्रम के प्रणेता थे और जैन सोशल ग्रुप मुंबई मेन के पूर्व अध्यक्ष थे। 1985 क्लबों का युग था; समाज के युवक-युवतियों को विवाह में बहुत कठिनाई होती थी। चारों फिरकों को जोड़ना आवश्यक है, यह ध्यान में रखते हुए JSG की स्थापना हुई। श्री चिमनभाई की प्रेरणा और आशीर्वाद से 1980 में 16 समूहों को एकत्र कर JSG का फेडरेशन स्थापित किया गया। हम अपने सह-संस्थापक को नमन करते हैं।

JSGian Labhubhai G. Mehta
जैन सोशल ग्रुप की नींव का उल्लेख इस ऊर्जावान व्यक्तित्व श्री लाभुभाई मेहता के बिना अधूरा है, जिन्होंने तत्कालीन फेडरेशन के कोषाध्यक्ष के रूप में अपने मैत्रीपूर्ण और सरल दृष्टिकोण से उपक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। वे एक दुर्लभ व्यक्तित्व थे जो हमेशा समाज के समग्र उत्थान के बारे में सोचते थे, और आज उन्हीं की बदौलत हम इस वृक्ष के फलों का आनंद ले रहे हैं।

JSGian Sukhlal Bakhai
श्री सुखलालभाई बखाई भी जैन सोशल ग्रुप के प्रणेता थे। उन्होंने JSG इंटरनेशनल फेडरेशन के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत प्रयास किए। वे मुंबई मेन के पूर्व अध्यक्ष भी थे। जैन संस्कृति और जैन एकता की रक्षा में उनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान था। हम अपने सह-संस्थापक को नमन करते हैं।
हमारे संस्थापकों को श्रद्धांजलि
जैन धर्म के चारों फिरकों को एक छत के नीचे लाने का उनका सपना आज विश्व भर में 400+ समूहों वाला उपक्रम बन चुका है। उनके समर्पण और दूरदर्शिता के प्रति हम सदैव कृतज्ञ हैं।